द जागरण टाइम्स, झारखण्ड रांची 22 अक्टूबर । सच कहा जाए तो पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। देश और विदेश की कोयला जरूरत को पूरी करने वाली सबसे बड़ी कंपनी कोल इंडिया के पूर्व महाप्रबंधक रह चुके डाॅ. अशोक कुमार ने इस बात को साबित किया है। कोयला कंपनी में लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले इंजीनियर डाॅ. अशोक कुमार की कहानी युवाओं और छात्रों को प्रेरित करने के लिए पर्याप्त है। लंबे करियर के बाद वे 30 सितंबर 2018 में कोल इंडिया लिमिटेड में जीएम के रूप में सेवानिवृत हुए।इसके बाद इन्होंने एक और जगह काम किया और फिर से बाद 2025 में वहां से भी सेवानिवृत हो गये। इसके बाद भी इनके पढ़ने की ललक कम नहीं हुई। इन्होंने रांची विश्वविद्यालय के पीजी साइकोलाजी में नामांकन लिया है और छात्र के रूप में फिर से पढ़ाई शुरू की। एक प्रकार से डॉक्टर अशोक की भूमिका अब 68 वर्ष की आयु में फिर से छात्र की है और वह रांची यूनिवर्सिटी में दूसरे विद्यार्थियों के बीच मनोविज्ञान की स्टडी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर आपकी रुचि पढ़ने में है तो इस मामले में उम्र किसी भी तरह से बाधक नहीं हो सकती।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



