डेस्क, द जागरण टाइम्स, 22अक्टूबर। क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब भी हमें छींक आती है, तो हमारी आँखें अपने आप बंद हो जाती हैं! लेकिन ऐसा क्यों होता है? क्या हमारा दिमाग हमें ऐसा करने का आदेश देता है? आइए जानते हैं इसके पीछे का विज्ञान!
ऐसे पहुंचता है सिग्नल
जब धूल, परागकण या कोई उत्तेजक पदार्थ हमारी नाक में प्रवेश करता है, तो नाक की नसें दिमाग को संकेत भेजती हैं। इसके बाद शरीर छींक के जरिए उन पदार्थों को बाहर निकालने की कोशिश करता है।
मस्तिष्क निभाता है अपनी भूमिका
छींक एक अनैच्छिक प्रतिक्रिया है, यानी यह बिना हमारी इच्छा के अपने आप हो सकती है। इस दौरान चेहरे की कई मांसपेशियाँ सक्रिय होती हैं और पलकें भी अक्सर बंद हो जाती हैं।
आँखें बंद होना जरूरी क्यों है
?वैज्ञानिकों को अभी तक इसका कोई एक निश्चित कारण नहीं मिला है। माना जाता है कि छींक के दौरान चेहरे की मांसपेशियों की गतिविधियों के साथ पलकों का बंद होना जुड़ा हुआ है।4. क्या आँखें खुली रखकर छींक सकते हैं?छींकते समय आँखें बंद होना सामान्य है, लेकिन यह कोई ऐसा अनिवार्य नियम नहीं है कि हर व्यक्ति की आँखें हर बार पूरी तरह बंद ही हों। आँखें खुली रखने से वे बाहर नहीं निकल जातीं—यह एक आम मिथक है!
यह भी जानिए
छींक के दौरान शरीर की कई मांसपेशियाँ एक साथ काम करती हैं। यह हमारे शरीर की उन प्राकृतिक प्रतिक्रियाओं में से एक है, जो बाहरी उत्तेजनाओं के जवाब में तुरंत सक्रिय हो जाती हैं।याद रखें: छींक को रोकने के लिए नाक और मुँह को जोर से बंद न करें। ऐसा करने से कानों और श्वसन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



