सकारात्मक चिंतन के माध्यम से बढ़ेगी कीर्ति : यादव
@रजनी चौहान, कोरबा, 1 नवम्बर। सामाजिक कार्यकर्ता एवं गायत्री परिवार से जुड़े टेकराम यादव ने कहा है कि शोर हमेशा नकारात्मक नहीं होता। सकारात्मक उद्देश्य से उठने वाली आवाज व्यक्ति के साथ-साथ पूरे समाज को नई पहचान और यश दिला सकती है। वहीं नकारात्मक सोच के साथ उठने वाली आवाज भले ही प्रभावशाली लगे, लेकिन वह किसी को सही दिशा देने के बजाय व्यक्ति अथवा समूह को दिशाहीन कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी सोच, व्यवहार और अभिव्यक्ति में सकारात्मकता बनाए रखें।

कोरबा जिले के दादरखुर्द स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रधान पाठक श्री यादव ने कहा कि हमारे आसपास हर समय अलग-अलग तरह की वाइब्रेशन (ऊर्जा तरंगें) मौजूद रहती हैं। ये न केवल हमारे व्यक्तित्व और विचारों को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज में हमारी पहचान भी निर्धारित करती हैं। वर्तमान दौर में अनेक चिंताओं और चुनौतियों के बीच जरूरत इस बात की है कि हम स्वयं सकारात्मक वाइब्रेशन पैदा करें और अपनी ऊर्जा से दूसरों को भी प्रेरित एवं ऊर्जावान बनाएं।
सामाजिक सरोकार रखने वाली संस्थाओं से जुड़े श्री यादव ने कहा कि एक शोर ऐसा होता है, जो किसी का सुख-चैन छीन सकता है। भ्रांतियां पैदा कर सकता है और अनावश्यक मुश्किलों को बढ़ा सकता है। इसके विपरीत सकारात्मक उद्देश्य से उठने वाली आवाज समाज में नई चेतना और ऊर्जा का संचार करती है। ऐसी आवाज से असंख्य लोग प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं। व्यक्ति स्वयं भी समाज के लिए एक आदर्श और प्रेरणास्रोत बन सकता है।
पिछले कई दशक से आदर्श शिक्षक के रूप में अपनी विशिष्ट जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे टेकराम यादव लंबे समय से गायत्री परिवार से जुड़कर सामाजिक जागरूकता और आध्यात्मिक वातावरण के निर्माण में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि परम पूज्य आचार्य श्रीराम शर्मा ने जिस उद्देश्य और विचारधारा के साथ गायत्री परिवार की नींव रखी थी, वह आज केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व के अनेक देशों में विस्तार प्राप्त कर चुका है। इस संगठन का मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज और राष्ट्र के निर्माण की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।श्री यादव के अनुसार, हर व्यक्ति को यह विचार करना चाहिए कि उसकी आवाज और उसके प्रयास समाज को क्या दे रहे हैं। शोर करना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उस शोर का उद्देश्य ऐसा होना चाहिए, जिससे व्यक्ति के साथ समाज का भी मान-सम्मान बढ़े।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।







