मप्र विधानसभा पेपरलेस होगा विधानसभा का अगला सत्र
जागरण टाइम्स, भोपाल 29अक्टूबर।मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन नेवा के अंतर्गत विधायकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। विधानसभा में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में लोक लेखा समिति के अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत, प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अजय विश्नोई, विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा, प्रशिक्षण के लिए आए प्रदेश के विधायकगण सहित विधानसभा के अधिकारी कर्मचारियों उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि लंबे समय से हम सब लोग डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पर काम कर रहे थे, प्रसन्नता है कि अब यह कार्य अंतिम चरण में है। हम सभी जानते हैं कि अगर हमें आगे बढ़ाना है तो युग के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। जब भी कोई नई तकनीक आती है तो एक पक्ष उस नई विधा का विरोध करता है और एक पक्ष उसे नई विधा को अस्त्र बनाकर प्रतिस्पर्धा में अन्य लोगों के साथ विजय प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूर दृष्टि वाले नेता हैं। अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के शुरुआती दौर में जब उन्होंने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया का लक्ष्य रखा तो इन्हें नारा माना गया। वैसे नारे जैसे सामान्य तौर पर राजनीतिक क्षेत्र में लगाए जाते हैं। लेकिन आज देश डिजिटल क्रांति के जिस स्थान पर खड़ा हुआ है उसकी तारीफ पूरी दुनिया कर रही है। तकनीक का उपयोग करके समय भी बचाया जा सकता है और गुणवत्ता एवं प्रदर्शित प्रगति लाई जा सकती है। विधानसभा के सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग कर हम पूरी पारदर्शिता के साथ अपने जीवन को खुला रख सकते हैं तथा जिन मतदाताओं ने हमको निर्वाचित करके इस सदन में पहुंचाया है उनके सामने अपने कार्यों को रख सकते हैं। डिजिटल इंडिया का ही परिणाम है कि चाहे किसान सम्मान निधि हो या लाडली बहन योजना, एक बटन दबा कर पैसा सीधा हितग्राही के खाते में पहुंचा दिया जाता है। बीच में कोई भी बिचौलिया नहीं होता है। जबकि पहले की सरकारों में यही असंतोष रहता था कि पात्र व्यक्तियों को पैसा नहीं मिला। तकनीक समय भी बचाती है और पारदर्शिता भी लाती है। पहले जब विधायकों को प्रश्न लिख कर जमा करने होते थे, तब विधानसभा के एक सत्र में औसत 700 प्रश्न तक आया करते थे। ऑनलाइन व्यवस्था होने के बाद एक सत्र में प्रश्नों की संख्या चार हजार तक पहुंच गई है। ये चार हजार प्रश्न हर सदस्य के क्षेत्र की आवाज हैं। जब इतनी बड़ी संख्या में समस्याएं सरकार तक पहुंचती है और सरकार इनका निराकरण करने के लिए व्यवस्थाओं को अधिक सक्षम बनाती है। ई विधानसभा होने के बाद विधानसभा के कार्य में कुशलता और पारदर्शिता आ सकेगी और इस तरह जनता की समस्याओं को व्यापक रूप से समाधान हो सकेगा।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।







