राष्ट्रऋषि की जयंती पर नृत्य, गीत और संगीत की त्रिवेणी, आनंदित हुए श्रोता
जागरण टाइम्स, चित्रकूट 27 अक्टूबर। संस्कृति संचालनालय मध्यप्रदेश द्वारा दीनदयाल शोध संस्थान एवं जिला प्रशासन सतना व चित्रकूट क्षेत्र की जनता जनार्दन के सहयोग से चित्रकूट में पारम्परिक नृत्य एवं गायिकी केन्द्रित तीन दिवसीय शरदोत्सव की समापन संध्या में मुंबई के गायक श्रीराम अय्यर एवं उनकी टीम द्वारा अपने भजनों की प्रस्तुति से दर्शकों को भाव विभोर किया। उन्होंने अपने अंदाज में गायन का ऐसा जादू चलाया कि लोग गुलाबी ठंड और भींगी-भीगी ओस के बीच देर रात्रि तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।

राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख की जयंती के अवसर पर धार्मिक नगर चित्रकूट में यह आयोजन किया गया। शरदोत्सव की समापन संध्या का शुभारंभ कामदगिरि पीठम के महंत मदन गोपाल दास , फलाहारी आश्रम के महंत रामप्यारे दास , पंजाबी भगवान आश्रम के महंत रामदास नागा, महंत दिनेश दास , रामसखा आश्रम के महंत सच्चिदानंद , खाकी अखाड़ा के महंत रामजन्म दास , रामानंद आश्रम के महंत बलराम दास , सुदामा कुटी के महंत रामलखन दास जी, नर्मदापुरम के सांसद दर्शन चौधरी, सीधी सांसद राजेश मिश्रा, बांदा कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय बांदा के कुलपति प्रो एसबीएस राजू, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के पूर्व कुलगुरु प्रो कपिल देव मिश्रा, भोपाल विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष सुनील पांडे, सद्गुरु सेवा संघ के ट्रस्टी डॉ इलेश जैन, सद्गुरु सेवा संघ से श्रीमती ऊषा बी जैन, जनपद चित्रकूट के मुख्य विकास अधिकारी डीपी पाल, पूर्व सांसद बांदा चित्रकूट रमेश द्विवेदी, पूर्व सांसद मुरैना अशोक अर्गल, बांदा-चित्रकूट कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष सतना श्रीमती सुष्मिता सिंह परिहार, सतना के जिला पंचायत सदस्य संजय सिंह कछवाह, विंध्य व्यापार मंडल सतना के अध्यक्ष सतीश सुखेजा, सामाजिक कार्यकर्ता श्री चूड़ामणि सिंह, चित्रकूट के जिला कार्यवाह अतुल सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता श्याम सुंदर मिश्रा, जनजाति कल्याण केंद्र डिंडोरी के उपाध्यक्ष डॉ हरिशंकर मरकाम, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ सुदीप्ति श्रीवास्तव, तुलसी शोध संस्थान की निदेशक श्रीमती मंजूषा राजस जोहरी, महोबा से भागीरथ नगाइच, सतना से श्री चंद्रकमल त्रिपाठी, श्री कमलेश मिश्रा द्वारा भारत रत्न नानाजी देशमुख की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया गया

।दीनदयाल परिसर चित्रकूट में आयोजित शरदोत्सव की समापन संध्या को संबोधित करते हुए सांसद नर्मदापुरम श्री दर्शन चौधरी ने राष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख का स्मरण करते हुए कहा कि नानाजी के कृतित्व ने भगवान राम की तपोस्थली में चैतन्यता जगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि उनकी ऊर्जा और प्रेरणा से उनके बताये मार्ग पर क्षेत्र का उत्थान किया जा सकता है। विश्व में समाज सेवा के क्षेत्र में दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्य एक अनुकरणीय मॉडल है। नानाजी ने राजसत्ता को छोड़कर चित्रकूट आने के बाद वनवासियों के आत्मविश्वास को जगाने का काम किया है। सीधी सांसद राजेश मिश्रा ने कहा कि सेवा का भाव और मानव समाज के लिए समर्पण का भाव से नानाजी ने एक अलग उदाहरण समाज में प्रस्तुत किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का जो स्वप्न देखा है उस दिशा में श्रद्धेय नानाजी ने अपने कार्यो से चित्रकूट जैसे क्षेत्र में काम करके दिखाया है।श्री कामदगिरि पीठम के महंत श्री मदन गोपाल दास जी ने अपने आशीर्वचनों में कहा कि चित्रकूट की जागृति, प्रभुता और सम्पन्नता यह सब नानाजी के आने से हुई है। मां मंदाकिनी के रौद्र रूप के बाद शरदोत्सव के इस आयोजन को टाला गया था, लेकिन संत समाज के विशेष आग्रह को स्वीकार करते हुए आयोजक मंडल ने तीन दिवसीय शरदोत्सव की इस परंपरा को बरकरार रखा।शरदोत्सव की आखिरी शाम मुंबई से आये गायकों के नाम रही, जिन्होंने शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर मजूबर कर दिया।

वहीं अन्य प्रस्तुति में शासकीय संगीत महाविद्यालय मैहर के कलाकारों द्वारा ऐतिहासिक ‘मैहर वाद्यवृंद’ की जुगलबंदी ने दर्शक श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। मैहर बैंड के प्रमुख सौरभ कुमार चौरसिया (ज़लतरंग), गोकर्ण पांडे उत्तम (वायलिन), कमल किशोर माहौल (तबला), गौतम भारती (हारमोनियम), बृजेश कुमार द्विवेदी (सरोद), मोहम्मद अहमद खान (सारंगी), डॉ अशोक बाड़ोलिया (तबला), राम सुमन चौरसिया (सितार) के प्रदर्शन में शास्त्रीय रागों के साथ-साथ भारतीय लोक संगीत और पाश्चात्य शास्त्रीय धुनों का एक अद्भुत संगम देखने को मिला।मुंबई के गायक श्रीराम अय्यर एवं उनके सहयोगी सिंगर नीव कनानी और सुश्री विदिता ने सुप्रसिद्ध भजनों की आकर्षक प्रस्तुति की। श्री गणेश वंदना से शुरू हुई भजन संध्या में देवा श्री गणेशा, अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम्, कभी राम बनके कभी श्याम बनके, अगड़ बम बगड़ बम बम लहरी, पायो जी मैंने राम रतन धन पायो, राम राम जय राजा राम आदि एक के बाद एक भजनों को अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुत किया। मुंबई से आई टीम में ड्रम पर राहुल सिरिशकर, तबला पर अंकित सोनो ने, कीबोर्ड पर शुभम सेठ और गिटार पर आदित्य बुद्धा, बांसुरी पर रोहन खंगारे का आकर्षक प्रदर्शन रहा। पूरी संध्या में नृत्य, गीत और संगीत की त्रिवेणी को दर्शकों ने अपार प्रेम और उत्साह प्रदान किया।शरदोत्सव के आखिरी संध्या के कार्यक्रम की कर्णप्रिय और मधुर उद्घोषणा साकेत शुक्ला, अशोक दीक्षित एवं श्रीमती रीना मालवीय द्वारा की गई। कार्यक्रम के अंत में दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन द्वारा सभी कलाकारों का अभिनंदन किया गया

।प्रसिद्ध गायकों ने शरदोत्सव में छोड़ी अमिट छापराष्ट्र ऋषि नानाजी देशमुख के जन्मोत्सव से प्रारम्भ हुए तीन दिनी शरदोत्सव में अब तक देशभर के अनेक ख्याति प्राप्त कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियां देकर शरदोत्सव को अविस्मरणीय बना चुके है। प्रमुख रूप से अब तक प्रसिद्ध गायक अनुराधा पौडवाल, रवीन्द्र जैन, सुरेश वाडेकर, मनोज तिवारी, पवन तिवारी, विनोद राठौर, कैलाश खैर, नितिन मुकेश, प्रसिद्ध भजन सम्राट अनूप जलोटा एवं नृत्यांगना डोना गांगुली, सुधा चन्द्रन, डिम्पल डिप्युटी शाह, ग्रेसी सिंह, मोहित चौहान, उदित नारायण, पवनदीप राजन एवं अरुणिता कांजीलाल की प्रस्तुतियों ने शरदोत्सव को ऐतिहासिक बनाने में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। शरदोत्सव के समापन पर संगीत का आनन्द लेने के लिये बहुत बड़ी संख्या में जन सैलाब उपस्थित रहा। फतेहपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, महोबा, झाँसी, बांदा, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, रीवा, जबलपुर, ग्वालियर आदि जिलों से लोगों का समूह शरदोत्सव देखने के लिये चित्रकूट आया।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।







