स्वास्थ्य क्षेत्र में बालको के कार्यों को सराहा
जागरण टाइम्स, रायपुर / कोरबा 30 अक्टूबर । वेदांता मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन (वीएमआरएफ) की इकाई और मध्य भारत के प्रमुख कैंसर उपचार संस्थानों में से एक, बालको मेडिकल सेंटर (बीएमसी) ने छत्तीसगढ़ के नया रायपुर स्थित अपने परिसर के फेज़ 2 विस्तार के लिए मंत्री ओ. पी. चौधरी की उपस्थिति में भूमिपूजन किया। इस अवसर पर बीएमसी के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में उन्नत टोटल बॉडी इर्रेडिएशन तकनीक की शुरुआत भी की गई। यह विशेष रेडिएशन उपचार तकनीक छत्तीसगढ़ में पहली बार शुरू की जा रही है।
फेज़ 2 विस्तार के अंतर्गत प्रस्तावित 205 बिस्तरों व मौजूदा 170 बिस्तरों के साथ कुल 375 बिस्तरों का कैंसर एवं संबद्ध विशेषज्ञता अस्पताल विकसित किया जाएगा। यहां बीएमसी की मौजूदा कैंसर उपचार सेवाओं के साथ कार्डियोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जैसी विशेषज्ञ सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। यह विस्तार क्षेत्र में विशिष्ट स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने और जटिल चिकित्सा स्थितियों वाले मरीजों को समन्वित उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस विस्तार योजना में परिसर के भीतर नर्सिंग हॉस्टल और मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए प्रस्तावित 300-बेड की आवासीय सुविधा भी शामिल है। इस सुविधा में उपचार के दौरान मरीजों और उनके परिजनों के ठहरने की व्यवस्था होगी। विशेष रूप से दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले उन परिवारों को इसका लाभ मिलेगा, जिन्हें उपचार की पूरी अवधि के दौरान अस्पताल के नजदीक रहने की आवश्यकता होती है।
मंत्री ओ. पी. चौधरी ने इस दौरान कहा, ‘किसी भी राज्य के विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और छत्तीसगढ़ इन्हें मजबूत करने की दिशा में निरंतर निवेश कर रहा है। बीएमसी का फेज़ 2 विस्तार इसी प्रयास के अनुरूप है। इससे मध्य भारत में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और उन्नत उपचार सुविधाओं का विस्तार होगा तथा स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्र की अपनी क्षमताएं विकसित होंगी। इससे हमारे लोगों को इलाज या प्रशिक्षण के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी। इस महत्वपूर्ण पहल के लिए मैं वीआरएमएफ को बधाई देता हूं।
वीएमआरएफ की चेयरपर्सन ज्योति अग्रवाल ने कहा, वीआरएमएफ की स्थापना आठ वर्ष पहले इस दृष्टिकोण के साथ की गई थी कि किसी भी व्यक्ति को उसके निवास स्थान या आर्थिक स्थिति के कारण गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। यही दृष्टिकोण शुरुआत से बीएमसी का मार्गदर्शन करता रहा है और हम प्रतिदिन इसे साकार करने के लिए प्रयासरत हैं। फेज़ 2 विस्तार इसी यात्रा का अगला महत्वपूर्ण कदम है। बीएमसी के विस्तार के साथ हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ती है कि हर नई विशेषज्ञता और तकनीकी प्रगति का लाभ उन मरीजों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। मैं मंत्री ओ. पी. चौधरी के सहयोग के लिए आभारी हूं। साथ ही, हमारे डॉक्टरों, नर्सों और सभी कर्मचारियों का भी आभार व्यक्त करती हूं, जिनके समर्पण से यह प्रगति संभव हो रही है।
बीएमसी ने अपने ट्रूबिम लीनियर एक्सीलरेटर का उपयोग करते हुए एक्सटेंडेड सोर्स-टू-स्किन डिस्टेंस टोटल बॉडी इर्रेडिएशन तकनीक शुरू की है। इस तकनीक में मरीज को रेडिएशन स्रोत से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर रखा जाता है, ताकि एक ही उपचार क्षेत्र में पूरे शरीर को रेडिएशन दिया जा सके।
टीबीआई रेडिएशन थेरेपी का एक विशेष प्रकार है, जिसका उपयोग स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से पहले पात्र मरीजों को उपचार के लिए तैयार करने में किया जाता है। जब ट्रांसप्लांट की सलाह दी जाती है, तब कुछ रक्त कैंसर और गैर-कैंसर संबंधी रक्त विकारों, जिनमें सिकल सेल रोग और थैलेसीमिया शामिल हैं, के उपचार में इसे शामिल किया जा सकता है।रक्त कैंसर से पीड़ित मरीजों में टीबीआई पूरे शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करने में मदद कर सकती है। इसमें मस्तिष्क जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां केवल कीमोथेरेपी के माध्यम से पर्याप्त उपचार करना कुछ परिस्थितियों में कठिन हो सकता है।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।







