320 दिवस का रोजगार सृजित, ग्रामीण आजीविका को मिला संबल
द जागरण टाइम्स, कोरबा,13 अक्टूबर 2026। शासन की रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण और आजीविका के नए अवसर विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसका सकारात्मक उदाहरण जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा की ग्राम पंचायत पसान के निवासी सुकुलराम हैं, जिनके खेत में सिंचाई कूप निर्माण से खेती-किसानी की तस्वीर बदल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

सुकुलराम के पास लगभग दो एकड़ कृषि भूमि है। पहले सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण वे अपने खेत से अपेक्षित उत्पादन नहीं कर पाते थे। खेती मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर होने से फसल उत्पादन प्रभावित होता था और सीमित आय के कारण परिवार के भरण-पोषण में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
इस समस्या के समाधान के लिए सुकुलराम ने रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत अपने खेत में सिंचाई कूप निर्माण के लिए ग्राम पंचायत में आवेदन किया। स्वीकृति मिलने के बाद उनके खेत में सिंचाई कूप का निर्माण कराया गया। इससे न केवल उनके खेत को सिंचाई का साधन मिला, बल्कि ग्रामीणों के लिए 320 दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ। इस प्रकार योजना के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही कृषि उपयोगी स्थायी परिसंपत्ति का निर्माण भी हुआ।
सिंचाई सुविधा से बढ़े उत्पादन के अवसर
सिंचाई कूप बनने के बाद सुकुलराम अब गर्मी के मौसम में भी अपने खेत में सब्जियों का उत्पादन कर पा रहे हैं। इससे उनके परिवार को ताजी सब्जियां उपलब्ध हो रही हैं और अतिरिक्त सब्जियां गांव में बेचकर आमदनी बढ़ाने का अवसर भी मिल रहा है। वहीं, सिंचाई की सुविधा मिलने से धान की फसल भी पहले की तुलना में बेहतर होने की उम्मीद है। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ परिवार की आय में सुधार की संभावनाएं बढ़ी हैं।
सुकुलराम का मानना है कि खेत में सिंचाई कूप बनने से खेती करना पहले की अपेक्षा आसान हुआ है। अब वे उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग कर पा रहे हैं और सब्जी उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
रोजगार गारंटी योजना के तहत निर्मित सिंचाई कूप सुकुलराम के लिए केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि बेहतर आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार बन रहा है। यह उदाहरण दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक है।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



