अशोक सिंहल फाउण्डेशन के निःशुल्क कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर

द जागरण टाइम्स,अयोध्या, 27 सितंबर। श्रद्धेय अशोक सिंहल की जन्म जयंती पर प्रति वर्ष होना वाला निःशुल्क कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर शताब्दी वर्ष में अपनी निर्धारित तिथि पर प्रारंभ हुआ। उद्धाटन समारोह में वक्ताओं ने अशोक जी की स्मृतियों को याद करते हुए, शिविर आयोजकों को बधाई और इस कार्य को दिव्यांगजनों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने वाला बताया।

अशोक सिंहल फाउण्डेशन द्वारा आयोजित निःशुल्क कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर के उद्धाटन अवसर पर मुख्य अतिथि महापौर गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि भव्य दिव्य राम मंदिर को प्रतीक मात्र है। हम अशोक जी के पराक्रम को सहेजने के लिए यहां के पूज्य संतों और विद्वतजनों से विचार कर कोई ठोस काम करना चाहते हैं। उद्घाटन अवसर पर कहा कि आज हम सभी के लिए गौरव का विषय है कि सनातन संस्कृति और श्रीराम लला मंदिर के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाले महापुरुष की 100वीं जन्म जयंती मना रहे हैं। अशोक सिंघल जी की स्मृतियां कॉल और समय की सीमाओं से परे हैं। जब-जब हिंदू सनातन संस्कृति की, उसके गुण अवगुणों, एकजुटता, चुनौतियों, समुचित मार्गदर्शन, भविष्य और कार्यक्रमों की चर्चा की जाएगी तो सबसे पहले श्रद्धा के साथ अशोक सिंघल जी का नाम लिया जाएगा।

इस देश में हिंदू बहुसंख्यक है यह बात कोई एक दिन की नहीं हजारों वर्षों की है, लेकिन इस देश में हिंदू बहुसंख्यक होने के बावजूद 1000 वर्षों तक गुलाम रहे। गुलामी की मानसिकता में उसे उसके कर्म को समझ और चर्चा बनाने तथा कमजोरी को दूर करके समाज को संगठित करने का काम और संगठित समाज के माध्यम से विकसित भारत और विश्व गुरु बनाने के स्वप्न में शक्ति भरने का काम की अवधारणा जीवंत करने का श्रेय मैं आदरणीय अशोक सिंघल जी को देता हूं। राम मंदिर तो हिंदू पुनरुत्थान और पुनर्जागरण का प्रतीक मात्र है। उसके माध्यम से हिंदू समाज संगठित हो, बिना संगठित समाज के राष्ट्र रक्षा, समाज की रक्षा नहीं की जा सकती इस विचार को जीवंत करने वाले महापुरुण को श्रद्धांजलि देता हूं।

सक्षम परिवार से जन्मे, आईआईटी बीएचयू के ग्रेजुएट ने व्यक्ति करियर पीछे छोड़ते हुए सनातन संस्कृति की पुकार पर मां भारती के लिए अपना सर्वस्व लगाया, अयोध्या की गलियां और चप्पा चप्पा उनके पुरुषार्थ और पराक्रम से परिचित है। 1990 की कारसेवा में चारों तरफ कर्फ्यू था, लगता था कि मुलायम सिंह यादव की गर्वोक्ति “परिंदा पर नहीं मार पाएगा” चरितार्थ हो जाएगी, लेकिन इस बीच एक महानायक के रूप में अशोक सिंघल जी अयोध्या आते हैं और जहां पर परिंदा पर मरने की बात हो रही थी उस बाबरी ढांचे पर भागवत ध्वज फहराया जाता है। उसे समय पूरा सनातन समाज शौर्य और उनके प्रति श्रद्धा से नात हो गया। ऐसा महानायक उनके अंदर था। मैं अशोक सिंहल फाउण्डेशन को तमाम दिव्यांगजनों की सहायता करने, उनके जीवन में मुस्कान लाने के लिए बधाई देता हूं।

महापौर ने कहा कि एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए बहुत जिम्मेदारी से कहना चाहता हूं कि राम मंदिर तो ठीक है लेकिन अयोध्या में उनकी स्मृतियों को सजाने के लिए यहां के जनजीवन को और भी कुछ करना चाहिए। मेरे भी दिमाग में कुछ चल रहा है, माननीय संतों और लोगों से परामर्श करके हम लोग इसमें आगे बढ़ेंगे।
अशोक सिंहल फाउण्डेशन शिविर के उद्धाटन अवसर पर विशिष्ट अतिथि एवं कंचन भवन के महंत पूज्य विजय दास जी महाराज ने कहा कि आज श्रद्धेय अशोक सिंघल जी की शताब्दी जयंती पर सेवा का प्रण लेना चाहिए। सेवा के माध्यम से आप जन-जन तक पहुंच सकते हैं। इस भौतिक जगत में अनेक प्रकार की विडंबनाएं हैं। जिसको लेकर हर एक परिवार अपने आप में बहुत पीड़ित है, बहुत कष्ट में है। सेवा ही एक माध्यम ऐसा है की जिसमें बहुत पैसा भी नहीं लगता है। हम कुछ नहीं कर सकते तो हम आपका चरण ही दबा सकते हैं। हम आपको स्नान ही करा सकते हैं, आपका वस्त्र ही धुल सकते हैं। इसी महान विचार के एक व्यक्तित्व का परिचय शताब्दी वर्ष में आप लोगों के बीच हो रहा है। पूज्य अशोक सिंघल जी के चिंतन को आगे बढ़ते हुए जन-जन की सेवा, सनातन संस्कृति के लिए कुछ कर गुजरने, प्रेम की भावना जगाने से उनका प्रकल्प यहां तक पहुंचा है। आगे भी आप सभी के सहयोग से दिन रात आगे बढ़ता जाएगा।
….जो रहीम दीनहिं लखै, दीनबंधु सम होय”
कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर के उद्घाटन अवसर पर अध्यक्षीय आशीर्वचन देते हुए श्रीराम वल्लभाकुंज के महंत अधिकारी राजकुमार दास जी महाराज ने सूफियाने अंदाज में कबीर को उद्घृत करते हुए कहा कि “कबिरा सोई पीर है जो जानै सब पीर, जो पर पीर न जानिए सो काफिर बे-पीर” श्रद्धेय अशोक सिंहल जी उसी कोटि के थे। उन्होंने रहीम को याद करते हुए कहा कि “दीन सबहिं को लखत हैं दीनहिं लखै न कोय, जो रहीम दीनहिं लिखै दीनबंधु सम होय” कुछ इसी तरह से अशोक सिंघल जैसा महापुरुष हमें प्राप्त हुआ। आज हम उनकी स्मृति में जन्म का शताब्दी वर्ष मना रहे हैं। अशोक जी की स्मृति में खोते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम लला के लिए कोई विषय आता था तो वह कहते थे ऐसे कैसा हो जाएगा। यह इस तरह से ही होना है। वह चीज आज किसी में नहीं दिख रही हैं। एक बार मणीराम दास जी की छावनी के सामने स्थित वाल्मीकि रामायण भवन में अशोकजी ने अपना संस्मरण सुनाया, की पूज्य देवराहा बाबा से कहा था मैंने की बाबा मंदिर कैसे बनेगा ? तो बाबा ने कहा कि बच्चा कायदे से बनेगा और हिंदू मुसलमान सब मिलकर बनाएंगे कहीं कोई एक भी हिंसा नहीं होगी। महापुरुष का वचन सत्य हुआ कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया और पूरे सनातन धर्म को मानने वाले विश्व के लोग नात होकर के आए। निधि समर्पण से लेकर अद्यतन ठाकुर जी की सेवा जारी है। उसके पीछे कहीं ना कहीं माननीय अशोक सिंघल जी ही हैं। क्योंकि इस तरह के विचार उनके अंदर दृढ़तापूर्वक रहते थे। चाहे वह सनातन धर्म का विषय हो, वेद का विषय हो। इधर वेद की परंपरा लुप्त हो रही थी। काशी आदि में तो वेद के विद्वान थे लेकिन श्रीअवध में धीरे-धीरे एक पीढ़ी थी उसके समाप्त होने के बाद वैदिक विद्वानों की कमी हो रही थी। हम इसके लिए भी उन्हें श्रद्धावन हैं। धर्मो रक्षति रक्षितः चरितार्थ हुई वह धर्म की रक्षा के लिए ही आए थे और सनातन धर्म को जो बुलंदियां मिली हैं उसमें अगर सर्वप्रथम किसी का नाम लिखा जाए तो वह अशोक सिंघल जी का होगा। राम मंदिर को लेकर के इतने लंबे अरसे तक संघर्ष करना यह सब हम लोगों के लिए एक धरोहर है। सिंहल जी ने जो किया है हमें नहीं लगता कोई जगद्गुरु शंकराचार्य कुछ भी बनता रहे लेकिन वह कार्य संभव ही नहीं हो सकता था, जो अशोक सिंहल ने किया। उन्होंने केवल राष्ट्र के लिए कार्य किया, सनातन के लिए कार्य किया। तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन कर रहें ना रहें। वह महात्मा के समान थे क्योंकि महात्माओं का लक्षण कहा गया है की मन वचन और कर्म से एक होना वह चीज सिंहल जी में दिखती थी। फाउंडेशन को महावीर सेवा न्यास को समस्त से जुड़े हुए लोगों को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि ऐसे महनीय व्यक्ति के जन्मोत्सव शताब्दी वर्ष के अवसर पर दिव्यांग लोगों के लिए उनके यथायोग्य सेवा दी जा रही है यह बहुत बड़ी सेवा है।
कार्यक्रम का परिचय विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह “पंकज” ने देते हुए अशोक सिंहल फाउण्डेशन के संचालक महेश भागचंद्रका और उनके परिवार का विश्व हिन्दू परिषद के साथ दिए गए योगदान को याद किया। कार्यक्र्म संचालन श्रीराम वेद विद्यालय के प्रधानाचार्य इंद्रदेव मिश्र ने किया। मुख्य रूप से संघचालक डॉ. विक्रमा प्रसाद पाण्डेय, आलोक सिंह रोहित, कारसेवकपुरम प्रभारी शिवदास सिंह, उमेश पोरवाल, वीरेंद्र, मयंक उपस्थित थे। बाद में पूर्व महापौर ऋषीकेश उपाध्याय, भाजपा जिलाध्यक्ष कमलेश श्रीवास्तव व अमल गुप्ता ने शिविर का निरीक्षण कर सेवा कार्य के प्रति संतोष व्यक्त किया।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



