127 कार्यकर्ताओं की भागीदारी हुई

जागरण टाइम्स, चित्रकूट 5 नवम्बर। दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा ग्राम स्वावलंबन कार्य में लगे चित्रकूट प्रकल्प के 127 कार्यकर्ताओं का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन उद्यमिता विद्यापीठ के लोहिया सभागार में किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ भारत रत्न नानाजी देशमुख की प्रतिमा पर दीपप्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ।इस अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव निखिल मुंडले, संगठन सचिव अभय महाजन, सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल, कोषाध्यक्ष वसंत पंडित, सचिव अपराजिता शुक्ला, मुख्य कार्यपालन अधिकारी अमिताभ वशिष्ठ, महाप्रबंधक डॉ अनिल जायसवाल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

ग्रामीण क्षेत्रों पर कैसे करता है कामकाज संस्थान कार्यशाला के प्रथम दिवस दीनदयाल शोध संस्थान गांव में कैसे काम करता है और क्यों काम करता है, इस पर पुराने कार्यकर्ताओं के अनुभवों के आधार पर नए कार्यकर्ताओं के साथ विचारों का आदान-प्रदान हुआ। जिसमें बताया गया कि ग्रामवासी ही परिवर्तन का वाहक है, नाना जी सदैव कहते थे कि जनता की पहल पुरूषार्थ एवं सहभागिता से किया गया कार्य सदैव स्थायी होता है। आज के समय में जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक असमानता, मानसिक तनाव और पर्यावरणीय संकट बढ़ रहे हैं, पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानव दर्शन ग्राम विकास की संकल्पना की मजबूत वैचारिक नींव बनता है।

कार्यशाला के दूसरे दिन स्वावलंबन अभियान 2.0 की जानकारी रखते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के कोषाध्यक्ष वसंत पंडित ने बताया कि नानाजी ने जब 26 जनवरी 2002 को चित्रकूट के ग्रामों में स्वावलंबन अभियान की शुरुआत पांच प्रमुख बिंदुओं जिसमें गरीबी, बेकारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, और हराभरा विवाद मुक्त ग्राम की कल्पना को शामिल किया था, अब आधुनिकता के आधार पर स्वावलंबन अभियान 2.0 ‘शाइन’ के रुप में शुरुआत करने का प्रयास किया जा रहा है। जिसमें ग्रामोदय से सर्वोदय से शुरू करके और अभ्युदय की ओर बढ़ते हुए एक ऐसा मॉडल बनाने का प्रयास है जो मापने योग्य, टिकाऊ और प्रतिकृति योग्य हो, जहां व्यक्तिगत और सामुदायिक लक्ष्यों में खुशी और पूर्ति शामिल होगी। इसे एक नए युग के लिए स्थिरता और खुशहाली सूचकांक के माध्यम से मापा जाएगा। जो स्वावलंबी ग्राम विकास ढ़ांचा तैयार करने में सहायक सावित होगा। इस कार्य को चित्रकूट क्षेत्र के 108 राजस्व गांवों में आयोजित करने का प्रस्ताव है, और एक आधार रेखा सर्वेक्षण से शुरू किया जा रहा है, जो सभी सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक संकेतकों को मापते हुए और उपभोग, अपशिष्ट और सामाजिक सद्भाव पर भी डेटा एकत्रित करने का काम शुरू किया गया है। समापन अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख कहते थे कि भारतीय गाँव की मुख्य शक्ति और उनकी विशेषता स्वावलंबन ही रहा है। हजारों साल की गुलामी के बावजूद भारतीय समाज ने अपने सांस्कृतिक स्वरूप और मूल्यों को गाँवों के स्वावलंबन के आधार पर ही जीवित बनाए रखा है। संस्थान के ग्रामीण स्वावलंबन का मुख्य आधार समाजशिल्पी दम्पति हैं, जो ग्राम विकास के कार्यों में उत्प्रेरक का कार्य करते हैं। समाज में रहकर नित अभिनव प्रयोग कर समाज को जाग्रत करना जिससे वे स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनने में सहभागी बनें। आप सभी पहले कार्य को देखें फिर उसे समझें तत्पश्चात उसे अपने जीवन मे उतारें।
डीआरआई के सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल ने शासन की योजनाओं के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर क्रियान्वयन को लेकर कहा कि सरकार, समाज और संस्था जब मिलकर काम करते हैं तो परिणाम बेहतर निकलते हैं। सामूहिक सहयोग देश और क्षेत्र के विकास की गति को तेज करता है। जब तीनों एक ही दिशा में प्रयास करते हैं, तो नीतियां और योजनाएं जमीन पर प्रभावी रूप से सफल होती हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक मुकेश त्यागी ने अपने आतिथ्य उद्बोधन में कहा कि ग्राम विकास को केवल किताबों से नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत और अनुभव से ज्यादा गहराई से समझा जा सकता है। यहां उपस्थित ‘समाज शिल्पी दंपति’ ग्राम विकास और स्वावलंबन की एक अनूठी अवधारणा है।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।







