
द जागरण टाइम्स | मैहर, मध्यप्रदेश 15अक्टूबर। मध्य प्रदेश के मैहर में स्थित मां शारदा देवी का मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों और आस्था के प्रसिद्ध केंद्रों में विशेष स्थान रखता है। त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा के दर्शन के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। नवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मां के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठता है। श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
🌹 त्रिकूट पर्वत पर विराजमान हैं मां शारदा
मैहर का मां शारदा मंदिर ऊंचे त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। मान्यता है कि मां शारदा विद्या, बुद्धि और शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं। विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और ज्ञान-साधना से जुड़े लोगों की यहां विशेष आस्था है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु सीढ़ियों के रास्ते पर्वत पर चढ़ते हैं। बुजुर्गों और अन्य जरूरतमंद श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोपवे की व्यवस्था भी उपलब्ध है। पर्वत से मैहर नगर और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का मनोहारी नजारा दिखाई देता है।
🌸 आल्हा-ऊदल से जुड़ी है लोकमान्यता
मां शारदा मंदिर का संबंध बुंदेलखंड की प्रसिद्ध लोकगाथाओं के वीर योद्धा आल्हा और ऊदल से भी जोड़ा जाता है। जनश्रुति के अनुसार, आल्हा मां शारदा के अनन्य भक्त थे और वे नियमित रूप से माता की आराधना करने आते थे। मंदिर के समीप स्थित आल्हा अखाड़ा और आल्हा तालाब जैसे स्थल इस लोकपरंपरा की याद दिलाते हैं। कहा जाता है कि आल्हा माता को ‘शारदा माई’ कहकर पुकारते थे। यह लोकविश्वास आज भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित है और मंदिर की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाता है।
❤️ नवरात्रि में विशेष रौनक, दर्शन के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मैहर का मां शारदा मंदिर विशेष रूप से सजाया जाता है। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक वातावरण में डूब जाता है। श्रद्धालु दूर-दराज से पहुंचकर माता के चरणों में शीश नवाते हैं। मंदिर परिसर और आसपास के बाजारों में भी पर्व की रौनक देखने को मिलती है। मां शारदा के प्रति अटूट विश्वास, प्राचीन परंपराएं और प्राकृतिक सौंदर्य मैहर को धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बनाते हैं। यहां आने वाले भक्त माता के दर्शन के साथ श्रद्धा और आध्यात्मिक शांति का अनुभव लेकर लौटते हैं।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



