द जागरण टाइम्स,कोरबा 13 अक्टूबर । शहर के शारदा विहार रेलवे क्रॉसिंग के आसपास सड़क की बदहाल स्थिति अब राहगीरों के लिए मुसीबत के साथ-साथ गंभीर हादसों को खुला न्योता दे रही है। क्रॉसिंग के ढलान वाले हिस्से में जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ने और वाहनों के गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। सड़क की मौजूदा हालत को देखते हुए लोगों को आशंका है कि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।विडंबना यह है कि जिस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं, उसकी बदहाली दूर करने के लिए अब तक कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है। बारिश के बाद सड़क की स्थिति और भी खराब हो गई है। गड्ढों में पानी भरने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। खासकर रात के समय और तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहनों के लिए यह मार्ग बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है।

महिला मंडल ने अपने खर्च पर कराई थी मरम्मत
शारदा विहार रेलवे क्रॉसिंग के आसपास की समस्या नई नहीं है। कुछ महीने पहले रेलवे ट्रैक के आसपास बने गड्ढों को ढकने और आवागमन को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शारदा विहार महिला मंडल ने अपने खर्च पर पहल की थी। महिला मंडल का यह प्रयास आम नागरिकों को राहत पहुंचाने और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से किया गया था। लेकिन बारिश ने इस अस्थायी व्यवस्था की पोल खोल दी। कुछ ही समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो गई और सड़क पर गड्ढों का खतरा दोबारा मंडराने लगा।यह स्थिति बताती है कि जनसहयोग से किए गए अस्थायी प्रयासों के बजाय अब यहां स्थायी और तकनीकी रूप से मजबूत समाधान की जरूरत है। आखिर कब तक स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही इंतजाम करते रहेंगे? जिम्मेदार विभागों को इस समस्या का स्थायी निराकरण करने के लिए आगे आना होगा।रेत परिवहन से सड़क पर बढ़ रहा दबावशारदा विहार रेलवे क्रॉसिंग के आसपास सड़क की बदहाली बढ़ने के पीछे भारी वाहनों की आवाजाही भी एक अहम वजह मानी जा रही है। हसदेव नदी क्षेत्र से दिनभर ट्रैक्टरों और हाईवा के माध्यम से रेत का परिवहन इसी मार्ग से किया जाता है। लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से पहले से जर्जर सड़क पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे उसकी स्थिति लगातार दयनीय होती जा रही है।एक ओर आम नागरिकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा नहीं मिल पा रही है, वहीं दूसरी ओर भारी वाहनों की आवाजाही इस समस्या को और गंभीर बना रही है। ऐसे में सड़क की मरम्मत के साथ-साथ भारी वाहनों के दबाव और आवागमन की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है।
रेलवे की जिम्मेदारी नहीं तो फिर कौन करेगा समाधान?
इस रेलमार्ग से विद्युत कंपनी और बालको के लिए कोयले की आपूर्ति करने वाली मालगाड़ियां भी गुजरती हैं। इसके बावजूद रेलवे की ओर से यह कहा जाता है कि आसपास की सड़क रेलवे की नहीं है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी रेलवे की नहीं बनती। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सड़क आम जनता के आवागमन से जुड़ी है और यहां दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है, तो इसके सुधार की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा?यह मामला केवल सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और जनहित से सीधे जुड़ा हुआ है। विभागीय जिम्मेदारियों के सवाल पर यदि इसी तरह स्थिति बनी रही, तो नुकसान आम लोगों को ही उठाना पड़ेगा। लोगों को इस बात से कोई सरोकार नहीं कि सड़क किस विभाग के अधीन है; उनकी अपेक्षा केवल इतनी है कि उन्हें सुरक्षित रास्ता मिले और किसी की जान खतरे में न पड़े।जिला प्रशासन करे पहल, मिले स्थायी समाधानशारदा विहार रेलवे क्रॉसिंग की बदहाल सड़क को लेकर जिला प्रशासन को गंभीरता से पहल करने की जरूरत है। संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सड़क की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराया जाना चाहिए और मरम्मत के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर रेलवे, जिला प्रशासन, नगर निगम और संबंधित सड़क निर्माण एजेंसियों के बीच संयुक्त बैठक कर स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।फिलहाल, दुर्घटना की आशंका को देखते हुए गड्ढों को तत्काल भरने, ढलान वाले हिस्से को सुरक्षित बनाने और आवश्यक चेतावनी संकेत लगाने जैसे कदम उठाना जरूरी है। लंबे समय के लिए सड़क का टिकाऊ निर्माण कराया जाना चाहिए, ताकि बारिश के बाद फिर वही स्थिति न बने।अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करेगा, या समय रहते शारदा विहार रेलवे क्रॉसिंग की सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगा? जनहित से जुड़े इस गंभीर मामले में अब आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई की जरूरत है।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



