द जागरण टाइम्स l 19 अक्टूबर 2026। बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के लगभग समस्त जिलोंमें हर साल बड़े पैमाने पर रेत का अवैध का अवैध तरीके से दोहन हो रहा है, जिससे नदियों का जल स्तर लगातार घट रहा है। अब प्रशासन के अलावाअदालतों ने भी ऐसे माफियाओं की नकेल कसना शुरू कर दिया है। बिलासपुर से एक ऐसा ही बड़ा फैसला आया है, जो रेत माफियाओं के लिए कड़ा संदेश है।छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के बीच न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। अरपा नदी के नगोई घाट पर बिना अनुमति रेत उत्खनन के मामले में दोषी पाए गए जेसीबी ऑपरेटर अनिल कुमार गौलिया को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने आरोपी पर एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अलावा, खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत 25 हजार रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड लगाया गया है।
गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व ही प्रदेश के कुछ अन्य जिलों में चल रहे मामलों में रेत का अवैध उत्खनन करने वालों के खिलाफ कैद की सजा सुनाई जा चुकी है। पूर्व में ऐसे मामलों में प्रशासन स्तर पर जुर्माना आदि लगाकर मामलों को ख़त्म कर दिया जाता था, मगर अब पुलिसिया कार्रवाई के चलते मामलों की अदालती सुनवाई हो रही है और दोषियों को सजा भी दिया जा रहा है।
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिले में 15 जून 2025 से रेत सहित अन्य खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक के लिए विशेष अभियान चलाया गया था। इस अभियान के तहत खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों ने कार्रवाई की। जिले भर के विभिन्न थानों में 66 प्रकरणों में FIR दर्ज की गई थी। इसी दौरान 17 जून 2025 को नगोई घाट स्थित अरपा नदी में JCB वाहन क्रमांक CG 11 AB 3246 के जरिए बिना अनुमति रेत उत्खनन का मामला पकड़ा गया।
इस प्रकरण में करगीरोड कोटा के डाकबंगला निवासी अनिल कुमार गौलिया, पिता तिलक राम गौलिया के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। न्यायालय ने सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2), सहपठित धारा 3 (5) के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही खान और खनिज अधिनियम 1957 की धारा 4(1), 4(1क) और 21 के तहत 25 हजार रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड भी लगाया गया। कुल 26 हजार रुपये का जुर्माना हुआ।
बिलासपुर जिले की जीवनदायिनी नदी अरपा से कई नदी-नाले जुड़े हैं और रेत के बेतहाशा उत्खनन उत्खनन इसके जल स्तर पर पद रहा है।हालांकि अवैध उत्खनन, खनिजों के अवैध परिवहन और भंडारण पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन द्वारा विशेष अभियान लगातार जारी है।विभिन्न विभागों की संयुक्त कार्रवाई के तहत दर्ज मामलों में अब न्यायालयीन प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और दोषियों को सजा मिलनी शुरू हो गई है।
अरपा नदी के नगोई घाट से जुड़े इस मामले में सुनाई गई सजा को अवैध खनन के खिलाफ जारी कार्रवाई के महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। यह फैसला उन लोगों के लिए चेतावनी है जो नदियों का सीना चीर कर अवैध कमाई कर रहे हैं।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



