❤️नवपत्रिका यात्रा का नाम भी मिला हुआ है इसे
द जागरण टाइम्स, कोरबा, 17अक्टूबर । शारदीय नवरात्र पर मां दुर्गा की आराधना बंगाली परंपरा के अनुरूप की जा रही है। षष्ठी तिथि से शुरू हुई दुर्गा पूजा के तहत पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। वहीं, सप्तमी की सुबह पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ महा स्नान (नवपत्रिका ) यात्रा निकाली गई। यह प्रकृति की उपासना, सनातन संस्कृति और देवी के प्रति अटूट आस्था को प्रकट करने का माध्यम था।

बंगाली समाज द्वारा पारंपरिक रीति के साथ दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। षष्ठी तिथि से पूजा की शुरुआत के बाद पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। शनिवार सप्तमी की सुबह समाज के लोगों ने शारदा विहार व अमरैया पारा से पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नव पत्रिका यात्रा निकाली। निर्धारित विधान के अनुसार केला सहित 9 पत्तों का जलाशय में स्नान कराया गया। फिर केले के वृक्ष की पूजा-अर्चना की गई। इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धा, समर्पण और प्रकृति के प्रति सम्मान का भाव प्रमुखता से दिखाई दिया। स्नान यात्रा में समाज के लोगों की भागीदारी रही।
आचार्य सोमनाथ लाहिड़ी ने बताया की नवरात्र पूजा में प्रकृति की उपासना का विशेष महत्व है। सनातन संस्कृति में देवी आराधना के माध्यम से दिव्य गुणों को आत्मसात करने और जीवन में सकारात्मकता लाने का भाव है। सोमनाथ लाहिड़ी ने बताया कि हमारे धार्मिक त्योहार और अनुष्ठान केवल परंपराओं का निर्वहन नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे मानवता को मजबूत बनाने का गहरा संदेश भी छिपा है। यही कारण है कि ऐसे पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ समाज में आस्था, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं। नव पत्रिका स्नान के बाद ही बंग समाज नवरात्र के अनुष्ठानों को विधिवत प्रारंभ करता है। नवमी तिथि तक यह सिलसिला जारी रहेगा।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



