
पाटीदार भवन और जलाराम मंदिर में गरबा की अलग पहचान
द जागरण टाइम्स, कोरबा 14अक्टूबर । अश्विन नवरात्र पर्व पर कोरबा में माता रानी की भक्ति और गरबा की धूम मची हुई है। देवी दर्शन और पूजन के साथ पूरा शहर भक्तिमय माहौल में रंगा हुआ है। दुर्गा पंडालों में गूंजते भक्ति गीतों की धुन पर गरबा और डांडिया करते श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। लयबद्ध कदमों और भक्ति में डूबे चेहरों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है, मानो श्रद्धालु मां भगवती की आराधना में पूरी तरह तल्लीन हो गए हों।
गुजराती आए, साथ लेकर आए गरबा
कोरबा में गरबा की शुरुआत का इतिहास यहां गुजराती परिवारों के आगमन से जुड़ा हुआ है। विद्युत कंपनियों और कोयला खदानों की स्थापना के दौर में व्यवसाय और रोजगार के सिलसिले में गुजरात से अनेक परिवार तत्कालीन अविभाजित मध्य प्रदेश के कोरबा क्षेत्र में पहुंचे। ये परिवार अपने साथ केवल नई उम्मीदें ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराएं भी लेकर आए। इसी क्रम में छोटे स्तर पर गरबा का आयोजन शुरू हुआ, जो समय के साथ विस्तारित होता गया। आज गरबा कोरबा की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है।
पाटीदार भवन और जलाराम मंदिर के गरबा की अलग पहचान
शारदीय नवरात्र 2026 के अवसर पर ट्रांसपोर्ट नगर स्थित पाटीदार भवन और जलाराम मंदिर परिसर में आयोजित गरबा विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां गरबा की परंपरा में भक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक मर्यादा को विशेष महत्व दिया जाता है। आयोजन में समय का पालन और निर्धारित नियमों का ध्यान रखा जाता है। अनावश्यक आडंबर से दूर रहकर मां भगवती की आराधना को केंद्र में रखने का प्रयास इन आयोजनों को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। यहां गरबा केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामूहिक आस्था और परंपरा को जीवंत बनाए रखने का माध्यम है।
यहां भी उमड़ रहे भक्तजन
कोरबा के पाटीदार भवन और जलाराम मंदिर के अलावा डॉ. राजेंद्र प्रसाद नगर फेज-1 एवं फेज-2, महाराणा प्रताप नगर, सीएसईबी कॉलोनी, सीसीएल कॉलोनी, सुभाष ब्लॉक, एंनटीपीसी कॉलोनी, एचटीपीपी और भगत सिंह कॉलोनी, मुड़ापार सहित शहर के अनेक इलाकों में सार्वजनिक आयोजन समितियों की ओर से गरबा और डांडिया की व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और युवा इन आयोजनों में उत्साहपूर्वक शामिल हो रहे हैं।आयोजन समितियों ने व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए अपने स्तर पर नियम और मापदंड निर्धारित किए हैं। इनका पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल में उत्सव का आनंद ले सकें। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों की रंग-बिरंगी प्रस्तुतियां नवरात्र के उल्लास को और बढ़ा रही हैं।
सांस्कृतिक परंपरा का विस्ताऱ
कोरबा शहर का विस्तार होने के साथ ही नवरात्र के दौरान गरबा और डांडिया के आयोजनों की संख्या भी बढ़ी है। औद्योगिक गतिविधियों के लिए पहचाने जाने वाले इस शहर में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का निरंतर विस्तार सामाजिक जीवन की एक महत्वपूर्ण विशेषता बन गया है।नौ दिनों तक चलने वाला गरबा उत्सव विभिन्न समुदायों को एक साथ जोड़ने के साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का अवसर भी देता है। मां भगवती की आराधना, पारंपरिक नृत्य, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता के बीच कोरबा में नवरात्र का उत्सव यह संदेश दे रहा है कि औद्योगिक विकास के साथ धर्म, संस्कृति और परंपराओं की जड़ें भी लगातार मजबूत हो रही हैं।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



