Asian Games 2026: भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए एशियन गेम्स का इतिहास अब तक उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। भारत ने इस प्रतियोगिता में कई बार शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन वेटलिफ्टिंग में अब तक गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब नहीं हुआ है। ऐसे में 2026 एशियन गेम्स में भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग टीम की अगुवाई करने जा रहीं स्टार खिलाड़ी मीराबाई चानू के पास इतिहास बदलने का बड़ा मौका होगा। अगर चानू इस बार पोडियम पर पहुंचती हैं, तो उनके नाम एक खास उपलब्धि जुड़ सकती है।
भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग टीम में चार खिलाड़ी शामिल हैं और टीम से देश को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। इससे पहले भारतीय वेटलिफ्टर्स ने ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 8 मेडल अपने नाम किए थे। इस प्रदर्शन में मीराबाई चानू का लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडल भी शामिल रहा। अब भारतीय वेटलिफ्टर्स की नजर एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन करने पर है।
एशियन गेम्स में अब तक नहीं आया गोल्ड
वेटलिफ्टिंग में भारत के एशियन गेम्स रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यह कहानी काफी लंबी है। 1951 में एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग को शामिल किए जाने के बाद से भारत ने इस खेल में कुल 14 मेडल जीते हैं। इनमें 5 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं, लेकिन भारत के खाते में अब तक एक भी गोल्ड मेडल नहीं आया है।
भारत के लिए एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग का आखिरी सिल्वर मेडल 1998 में बैंकॉक में आया था। कर्णम मल्लेश्वरी ने उस समय सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था। इसके बाद भारतीय वेटलिफ्टर्स एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल तक नहीं पहुंच सके।ऐसे में मीराबाई चानू के पास इस सूखे को खत्म करने का मौका होगा। अगर वह सिल्वर मेडल जीतती हैं तो भारतीय वेटलिफ्टिंग को करीब 28 साल बाद एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल मिलेगा। वहीं, अगर वह गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहती हैं तो यह एशियन गेम्स के इतिहास में वेटलिफ्टिंग में भारत का पहला गोल्ड मेडल होगा।
मीराबाई चानू के करियर का भी पूरा होगा बड़ा सपना
मीराबाई चानू के करियर की बात करें तो उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। वह ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीत चुकी हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके नाम लगातार तीन गोल्ड मेडल भी हैं। हालांकि एशियन गेम्स का मेडल अभी तक उनकी उपलब्धियों की सूची से दूर है।2014 के एशियन गेम्स में मीराबाई चानू नौवें स्थान पर रही थीं। इसके बाद 2018 के एशियन गेम्स में वह पीठ की चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सकीं। 2023 में हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी उनके पास मेडल जीतने का मौका था, लेकिन मुकाबले के दौरान चोट ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं।हांगझोऊ गेम्स में चानू ने चोट के बावजूद मुकाबला जारी रखा था। उन्होंने क्लीन एंड जर्क में 117 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन इस प्रयास के दौरान वह गिर गईं। आखिरकार उन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा और वह ब्रॉन्ज मेडल से 8 किलोग्राम पीछे रह गईं।अब 2026 एशियन गेम्स में मीराबाई के सामने एक बार फिर पदक जीतने की चुनौती होगी। अगर वह इस बार मेडल जीतती हैं तो उनके करियर में ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स—तीनों बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स के मेडल शामिल हो जाएंगे।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



