द जागरण टाइम्स,कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को जोर का झटका लगा है। निर्वाचन आयोग ने पार्टी के नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के उपयोग पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह निर्णय पार्टी के भीतर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावे के बाद लिया गया है। एक अच्छा को फुटबॉल खेलने खिलाड़ी और दूसरे को लिफाफा चिह्न दिया गया है।चुनाव आयोग के अनुसार, दोनों गुट खुद को तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक प्रतिनिधि बता रहे हैं। मामले के अंतिम निपटारे तक दोनों गुट तृणमूल कांग्रेस के पुराने नाम और चुनाव चिह्न का उपयोग नहीं कर सकेंगे। आयोग ने दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं।इस घटनाक्रम पर पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार ने आरोप लगाया कि किसी राजनीतिक दल को खत्म करने का फैसला जनता के जनादेश से होना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।इससे पहले जून 2026 में तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी की पश्चिम बंगाल की सभी समितियों और फ्रंटल संगठनों को भंग कर संगठनात्मक समीक्षा की घोषणा की थी। उस समय पार्टी के 80 में से करीब 60 विधायकों द्वारा बगावती गुट का समर्थन करने की खबर सामने आई थी।

केपी नारायण स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय।



